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खिचड़ी को अक्सर ‘सौम्य’ या ‘बीमार व्यक्ति का आहार’ माना जाता है, लेकिन सिखों के पवित्र लंगर में परोसी जाने वाली खिचड़ी इस धारणा को पूरी तरह से बदल देती है। लंगर की खिचड़ी न सिर्फ एक पौष्टिक भोजन है, बल्कि यह प्रेम, सेवा और समानता का प्रतीक भी है। इसकी खुशबू, स्वाद और जबरदस्त पौष्टिकता इसे एक अद्भुत व्यंजन बनाती है। इस लेख में, हम आपको स्टेप बाय स्टेप बताएंगे कि कैसे आप अपने घर पर ही बिल्कुल असली लंगर जैसी स्वादिष्ट और संपूर्ण खिचड़ी बना सकते हैं।

लंगर खिचड़ी का महत्व
लंगर सिख धर्म कीएक मौलिक परंपरा है, जहाँ बिना किसी भेदभाव के सभी जाति, धर्म और वर्ग के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। इस परंपरा में खिचड़ी एक केंद्रीय भूमिका निभाती है क्योंकि यह सरल, सस्ती, पौष्टिक और आसानी से बड़ी मात्रा में बनाई जा सकती है। यह व्यंजन शारीरिक भूख मिटाने के साथ-साथ आत्मा को भी तृप्त करता है और समुदाय की भावना को मजबूत करता है। इसे बनाने और परोसने की प्रक्रिया ही एक आध्यात्मिक अनुभव है।
सामग्री की तैयारी
लंगर स्टाइल खिचड़ी बनाने के लिए आपको बहुत ही साधारण और आसानी से उपलब्ध होने वाली सामग्रियों की जरूरत होगी। इसकी खास बात है कि इसमें किसी तरह के प्याज़ या लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, जिससे यह पूरी तरह से शुद्ध शाकाहारी और सात्विक बन जाती है। आपको चाहिए:
- 1 कप बासमती चावल
- 1/2 कप छिलके वाली मूंग दाल
- 1/4 कप चना दाल
- 1/4 कप अरहर दाल
- 1 बड़ा आलू (छोटे टुकड़ों में कटा हुआ)
- 1/2 कप गाजर (कद्दूकस की हुई)
- 1/2 कप फ्रेंच बीन्स (बारीक कटी हुई)
- 1 बड़ा टमाटर (बारीक कटा हुआ)
- 1 हरी मिर्च
- 1 इंच अदरक (बारीक कटा हुआ
- स्वादानुसार नमक।

मसालों का महत्व
इस खिचड़ी का असली जादू इसके मसालों में छुपा होता है। ये मसाले न सिर्फ स्वाद बढ़ाते हैं बल्कि सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं। आपको तैयार करने होंगे: 2 बड़े चम्मच देसी घी, 1 चम्मच जीरा, 1/2 चम्मच हींग, 1 चम्मच धनिया पाउडर, 1/2 चम्मच हल्दी पाउडर, 1/4 चम्मच गरम मसाला, 1 सूखा लाल मिर्च और एक छोटा टुकड़ा दालचीनी का। इन मसालों का तड़का लगाने से खिचड़ी में एक अद्भुत सुगंध और गहरा स्वाद आ जाता है।
दाल और चावल की धुलाई
खिचड़ी बनाने का पहला और बहुत जरूरी कदम है दालों और चावल को अच्छी तरह धोना। एक बड़े बाउल में चावल और सभी दालों (मूंग दाल, चना दाल, अरहर दाल) को डालें। इन पर पर्याप्त पानी डालकर अच्छी तरह हाथों से मल-मल कर धो लें। इस प्रक्रिया को 2-3 बार दोहराएं, जब तक कि पानी साफ न दिखने लगे। ऐसा करने से धूल और अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं और खिचड़ी हल्की और आसानी से पचने वाली बनती है। धुलाई के बाद इन्हें 30 मिनट के लिए पानी में भिगोकर रख दें।
खिचड़ी बनाने की विधि
एक भारी तले की कुकर या कड़ाही लें और उसे मध्यम आँच पर गर्म करें। अब इसमें 2 बड़े चम्मच देसी घी डालें। घी के गर्म हो जाने पर, उसमें 1 चम्मच जीरा और एक सूखी लाल मिर्च डालकर चटकने दें। इसके बाद, बारीक कटी हुई अदरक और हरी मिर्च डालकर एक मिनट तक भूनें। अब सभी कटी हुई सब्जियाँ – आलू, गाजर, फ्रेंच बीन्स और टमाटर डाल दें और 2-3 मिनट तक अच्छी तरह चलाते हुए भूनें।

मसालों को डालना
सब्जियोंको भूनने के बाद, अब बारी आती है मसालों की। सब्जियों में 1/2 चम्मच हींग, 1 चम्मच धनिया पाउडर, 1/2 चम्मच हल्दी पाउडर और दालचीनी का टुकड़ा डाल दें। मसालों को सब्जियों के साथ अच्छी तरह मिलाएं और तब तक भूनें जब तक कि मसालों की खुशबू आने न लगे। इससे मसालों का कच्चापन दूर हो जाता है और उनका स्वाद खिचड़ी में अच्छे से घुल जाता है।
दाल-चावल और पानी मिलाना
अब भीगे हुए दाल-चावल का पानी निथार कर उन्हें कुकर में डाल दें। सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाएं ताकि मसाले सभी दाल-चावल और सब्जियों में समा जाएं। अब इसमें स्वादानुसार नमक डालें। खिचड़ी में पानी डालना एक महत्वपूर्ण चरण है। सामान्य तौर पर, दाल-चावल और पानी का अनुपात 1:4 रखा जाता है। यानी आपने कुल 2 कप (1 कप चावल + 1 कप दाल) का मिश्रण इस्तेमाल किया है, तो उसमें 8 कप पानी डालें। इससे खिचड़ी गाढ़ी नहीं बल्कि लंगर जैसी थोड़ी दलियेदार और रसमय बनेगी।

खिचड़ी को प्रेशर कुक करना
सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाने के बाद, कुकर का ढक्कन बंद कर दें और मध्यम आँच पर 4-5 सीटियाँ आने दें। इसके बाद आँच बिल्कुल धीमी कर दें और लगभग 15-20 मिनट तक पकने दें। अगर आप कड़ाही में बना रहे हैं, तो ढक्कन बंद करके धीमी आँच पर तब तक पकाएँ जब तक कि दाल और चावल पूरी तरह से नर्म और गल न जाएँ। इतने देर तक पकने से सभी स्वाद एक दूसरे में घुल-मिल जाते हैं।
आखिरी तड़का लगाना
खिचड़ी के पक जाने के बाद, उसे कुकर से निकाल लें और एक अलग पैन में आखिरी तड़का तैयार करें। एक छोटी कड़ाही में 1 बड़ा चम्मच घी गर्म करें। उसमें एक चुटकी हींग और एक चुटकी गरम मसाला डालें। इस तड़के को तैयार खिचड़ी के ऊपर डाल दें। यह आखिरी तड़का खिचड़ी के स्वाद और सुगंध को एक अलग ही लेवल पर ले जाता है। खिचड़ी को हल्का सा गरम-गरम परोसें।

सर्विंग सज्जा
लंगर की खिचड़ी को परोसने का अपना ही एक अलग आनंद है। इसे गहरे कटोरे में निकालें और ऊपर से थोड़ा सा ताजा घी डालें। इसे ताज़े धनिए की पत्तियों और कटी हुई हरी मिर्च से गार्निश करें। लंगर में इसे आमतौर पर गर्म-गर्म उड़द दाल के पकौड़े, आचार और मीठी लस्सी के साथ परोसा जाता है। इन साइड डिशेज के साथ यह एक संपूर्ण और संतुलित भोजन बन जाती है।
स्वास्थ्य लाभ
लंगर स्टाइल खिचड़ीन सिर्फ स्वाद में बेहतरीन है बल्कि सेहत के लिए भी एक वरदान है। यह प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और फाइबर का एक संपूर्ण स्रोत है। दालों और चावल के कॉम्बिनेशन से कॉम्प्लीट प्रोटीन मिलता है। इसमें मौजूद हल्दी एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुणों से भरपूर है, जबकि जीरा और अजवाइन पाचन को दुरुस्त रखते हैं। यह आसानी से पचने वाली और शरीर को ऊर्जा देने वाली डिश है, जिसे बीमार व्यक्ति से लेकर स्वस्थ व्यक्ति तक सभी खा सकते हैं।

निष्कर्ष
लंगर स्टाइल खिचड़ी सिर्फ एक रेसिपी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सामुदायिक भावना का एक जीवंत हिस्सा है। इसे घर पर बनाना एक सरल और संतोषप्रद अनुभव है। यह रेसिपी आपको न सिर्फ एक स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक भोजन प्रदान करेगी, बल्कि आपको उसी शांति और तृप्ति का अनुभव भी कराएगी, जो लंगर में बैठकर भोजन करने से मिलती है। तो अगली बार जब आप कोई सरल, पौष्टिक और दिल को छू लेने वाला भोजन बनाना चाहें, तो इस लंगर स्टाइल खिचड़ी को जरूर आजमाएँ।