होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी भारतीय संस्कृति में सिर्फ भोजन नहीं बल्कि आपसी मेल-मिलाप और खुशी का प्रतीक मानी जाती है। रंग खेलने के बाद जब परिवार और रिश्तेदार एक साथ बैठकर दोपहर का खाना खाते हैं, तो वही पल होली की असली याद बन जाते हैं। इस दिन बनाया गया भोजन आम दिनों से थोड़ा खास, थोड़ा भारी और बहुत स्वादिष्ट होता है। होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में पारंपरिक दाल, सब्जी, चावल, रोटी के साथ-साथ दही, पापड़, चटनी और मिठाइयाँ भी शामिल होती हैं। पुराने समय में महिलाएँ सुबह से ही रसोई में लग जाती थीं ताकि रंग खेलने के बाद सभी को गरमागरम भोजन मिल सके।
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी इसलिए भी खास मानी जाती है क्योंकि इसमें शरीर को ठंडक देने वाले व्यंजन ज्यादा बनाए जाते हैं। दही, छाछ और रायता इस दिन पेट को आराम देने का काम करते हैं। होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी परिवार की पसंद और क्षेत्रीय स्वाद के अनुसार बदलती रहती है, लेकिन इसका मकसद एक ही होता है — रंगों की मस्ती के बाद स्वाद से भरपूर भोजन।

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Toggleहोली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में बनने वाली स्पेशल दाल
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में दाल को मुख्य भोजन का आधार माना जाता है, क्योंकि रंग खेलने के बाद शरीर को हल्का, सुपाच्य और पौष्टिक भोजन चाहिए होता है। इस दिन अधिकतर घरों में अरहर दाल, मूंग दाल या पंचमेल दाल बनाई जाती है, जो पेट को भारी भी नहीं लगती और पूरे परिवार के लिए उपयुक्त रहती है। होली के अवसर पर दाल को खास स्वाद देने के लिए इसमें देसी घी, जीरा, हींग और लहसुन का तड़का लगाया जाता है, जिससे इसकी खुशबू पूरे घर में फैल जाती है।
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में बनाई जाने वाली दाल सामान्य दिनों की तुलना में थोड़ी गाढ़ी और मसालेदार होती है, ताकि चावल या रोटी के साथ खाने में पूरा स्वाद मिले। कई जगहों पर दाल में थोड़ा सा अमचूर या नींबू का रस भी डाला जाता है, जिससे रंग खेलने के बाद थका हुआ शरीर ताजगी महसूस करता है। यह दाल न केवल स्वाद में बेहतरीन होती है बल्कि प्रोटीन से भरपूर होने के कारण ऊर्जा भी प्रदान करती है।
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में दाल का एक और खास कारण यह है कि यह सभी उम्र के लोगों के लिए सही रहती है। बच्चे, बुजुर्ग और युवा सभी इसे आसानी से खा सकते हैं। अगर मेहमान ज्यादा हों, तो दाल को बड़ी मात्रा में बनाना भी आसान होता है और यह जल्दी खराब भी नहीं होती। यही वजह है कि होली के दिन दाल को दोपहर के खाने का सबसे सुरक्षित और पसंदीदा विकल्प माना जाता है।
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में जब दाल को गरमागरम चावल, घी लगी रोटी और साथ में रायता या सलाद के साथ परोसा जाता है, तो इसका स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। यह साधारण सी दिखने वाली डिश होली के खाने को पूरी तरह संतुलित और यादगार बना देती है।
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में बनने वाली पारंपरिक सब्ज़ियाँ
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में सब्ज़ियों का चुनाव बहुत सोच-समझकर किया जाता है, क्योंकि रंग खेलने के बाद शरीर को हल्का लेकिन स्वादिष्ट खाना चाहिए होता है। इस दिन अधिकतर घरों में आलू-गोभी, मटर-पनीर, कढ़ी-पकौड़ा, या छोले जैसी पारंपरिक सब्ज़ियाँ बनाई जाती हैं, जो सभी को पसंद आती हैं और बड़ी संख्या में मेहमानों के लिए भी आसानी से बन जाती हैं। होली की सब्ज़ियों में मसाले थोड़े ज्यादा रखे जाते हैं, ताकि दाल और चावल के साथ खाने पर पूरा स्वाद आए।
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में आलू आधारित सब्ज़ियाँ खास मानी जाती हैं, क्योंकि आलू पेट को भरने वाला और ऊर्जा देने वाला होता है। आलू-टमाटर की सब्ज़ी या आलू-गोभी की सूखी सब्ज़ी रोटी और पूड़ी दोनों के साथ अच्छी लगती है। कई घरों में इस दिन कढ़ी-पकौड़ा जरूर बनाया जाता है, क्योंकि दही से बनी कढ़ी पेट को ठंडक देती है और रंग खेलने के बाद होने वाली थकान को कम करती है।
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में सब्ज़ियों को ज्यादा तला-भुना न बनाकर मध्यम मसाले में बनाना बेहतर माना जाता है। इससे खाना भारी नहीं लगता और सभी लोग आराम से पेट भरकर खा सकते हैं। अगर घर में बुजुर्ग या बच्चे हों, तो हल्की सब्ज़ी जैसे लौकी की सब्ज़ी या मिक्स वेज भी बनाई जा सकती है, जिससे भोजन संतुलित बना रहता है।
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में जब रंग-बिरंगी सब्ज़ियाँ थाली में सजकर आती हैं, तो खाने का मज़ा दोगुना हो जाता है। सब्ज़ियाँ न सिर्फ स्वाद बढ़ाती हैं बल्कि थाली को पूरा और आकर्षक भी बनाती हैं, जो होली के त्योहार की खुशियों को और बढ़ा देती हैं।

होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में चावल और पुलाव का महत्व
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में चावल का होना लगभग हर भारतीय घर में जरूरी माना जाता है, क्योंकि रंग खेलने के बाद हल्का और जल्दी पचने वाला भोजन सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। सादे उबले चावल, जीरा राइस या मटर पुलाव इस दिन खास तौर पर बनाए जाते हैं, ताकि दाल, कढ़ी या सब्ज़ी के साथ संतुलित भोजन मिल सके। चावल पेट को ठंडक देते हैं और दही या रायते के साथ खाने पर शरीर को आराम का एहसास कराते हैं।
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में पुलाव थोड़ा खास बनाया जाता है, जिसमें साबुत मसाले, हरी मटर, गाजर और कभी-कभी काजू-किशमिश भी डाली जाती है। यह पुलाव ज्यादा तीखा नहीं होता, जिससे हर उम्र का व्यक्ति इसे आसानी से खा सके। रंग खेलने के बाद भूख ज्यादा लगती है, ऐसे में पुलाव पेट भरने का काम करता है और ऊर्जा भी देता है।
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में चावल इसलिए भी पसंद किए जाते हैं क्योंकि इन्हें पहले से बनाकर रखा जा सकता है और परोसने में ज्यादा मेहनत नहीं लगती। अगर मेहमान ज्यादा हों, तो चावल जल्दी बन जाते हैं और सभी को बराबर मात्रा में परोसे जा सकते हैं। कई घरों में इस दिन खिचड़ी या तहरी भी बनाई जाती है, जो स्वाद और सेहत दोनों का ध्यान रखती है।
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में जब खुशबूदार चावल दाल और सब्ज़ी के साथ थाली में आते हैं, तो पूरा भोजन संतुलित और स्वादिष्ट बन जाता है। यही वजह है कि होली की दोपहर की थाली में चावल को खास जगह दी जाती है।

होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में रोटी, पूड़ी और पराठे
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में रोटी, पूड़ी और पराठों की अहम भूमिका होती है, क्योंकि ये हर सब्ज़ी और दाल के साथ आसानी से खाए जाते हैं। होली के दिन अक्सर पूड़ी या कचौड़ी बनाई जाती है, क्योंकि यह त्योहार की खास पहचान बन चुकी है। पूड़ी का हल्का कुरकुरापन और गरमागरम स्वाद दोपहर के खाने को खास बना देता है।होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में कई घरों में सादी रोटी के साथ-साथ मिस्सी रोटी या अजवाइन वाली रोटी भी बनाई जाती है, जिससे खाने में विविधता आती है।
पराठे भी एक अच्छा विकल्प होते हैं, खासकर आलू या मेथी पराठा, जो कम मसाले में भी बहुत स्वादिष्ट लगता है। ये सभी विकल्प पेट को भरने वाले होते हैं और ज्यादा देर तक भूख नहीं लगने देते। होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में पूड़ी इसलिए भी खास मानी जाती है क्योंकि इसे पहले से आटा गूंथकर और सब्ज़ी तैयार करके आसानी से तला जा सकता है। मेहमानों के लिए पूड़ी परोसना सम्मान और खुशी का प्रतीक माना जाता है।
कई जगहों पर पूड़ी के साथ आलू की रसेदार सब्ज़ी जरूर बनाई जाती है, जो इस जोड़ी को और भी स्वादिष्ट बना देती है। होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में जब पूड़ी, रोटी और पराठे एक साथ थाली में सजते हैं, तो खाने वाला खुद को किसी दावत से कम महसूस नहीं करता। ये व्यंजन होली की दोपहर को यादगार बना देते हैं।

होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में रायता, दही और ठंडी चीज़ें
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में रायता और दही को बेहद जरूरी माना जाता है, क्योंकि रंग खेलने के बाद शरीर में गर्मी बढ़ जाती है। ऐसे में दही से बनी चीज़ें पेट को ठंडक देती हैं और पाचन को भी बेहतर बनाती हैं। बूंदी रायता, खीरा रायता या मिक्स वेज रायता इस दिन सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं। रायते में हल्का सा भुना जीरा और काला नमक डालने से इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है।
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में दही सिर्फ रायते तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कई घरों में कढ़ी, छाछ या मीठा दही भी परोसा जाता है। ठंडी-ठंडी छाछ रंग खेलने के बाद तुरंत ताजगी का एहसास कराती है। बुजुर्गों के लिए यह सबसे सुरक्षित और फायदेमंद पेय माना जाता है।
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में ठंडी चीज़ों का महत्व इसलिए भी है क्योंकि ये मसालेदार खाने का संतुलन बनाए रखती हैं। दाल, सब्ज़ी और पूड़ी के साथ जब रायता शामिल होता है, तो खाना भारी नहीं लगता। यह पूरा भोजन शरीर के लिए संतुलित बन जाता है। होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में अगर खाने के साथ दही या रायता जरूर रखा जाए, तो त्योहार के बाद भी पेट हल्का और आरामदायक महसूस करता है।
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में सलाद और चटनी का योगदान
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में सलाद और चटनी खाने का स्वाद कई गुना बढ़ा देते हैं। कच्चा प्याज, खीरा, टमाटर और नींबू से बना सलाद न केवल स्वाद बढ़ाता है बल्कि शरीर को जरूरी पानी और फाइबर भी देता है। रंग खेलने के बाद यह सलाद थकान कम करने में मदद करता है। होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में हरी धनिया-पुदीना चटनी और इमली की मीठी चटनी खास तौर पर बनाई जाती है। ये चटनियाँ पूड़ी, पराठे और पकवानों के साथ बेहतरीन लगती हैं।
हल्की तीखी चटनी खाने में मज़ा भर देती है और भूख भी खोल देती है। होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में सलाद और चटनी का फायदा यह भी है कि इन्हें बनाना आसान होता है और ज्यादा समय नहीं लगता। अगर अचानक मेहमान आ जाएँ, तो सलाद और चटनी तुरंत तैयार की जा सकती है। होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में ये छोटी-छोटी चीज़ें पूरी थाली को खास बना देती हैं और खाने का अनुभव और भी यादगार हो जाता है।

होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में मिठाइयों की खास जगह
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी मिठाई के बिना अधूरी मानी जाती है। गुजिया, मालपुआ, रसगुल्ला या खीर इस दिन खास तौर पर बनाई जाती है। मिठाई होली की खुशी और मिठास का प्रतीक होती है, जिसे हर कोई खाना पसंद करता है। होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में अक्सर ऐसी मिठाइयाँ चुनी जाती हैं जिन्हें पहले से बनाकर रखा जा सके। इससे दोपहर के खाने के समय ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी पड़ती।
गुजिया और खीर इस मामले में सबसे बेहतर विकल्प मानी जाती हैं। होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में मिठाई का हल्का-सा स्वाद पूरे भोजन को संतुलित बना देता है। मसालेदार खाने के बाद मीठा खाने से मन और पेट दोनों संतुष्ट हो जाते हैं। होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में मिठाइयाँ मेहमानों के लिए खास आकर्षण होती हैं और त्योहार की याद को और मीठा बना देती हैं।
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में मेहमानों के लिए थाली सजाने का तरीका
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में थाली सजाने का भी खास महत्व होता है। रंग-बिरंगी सब्ज़ियाँ, दाल, चावल, पूड़ी और रायता जब सही तरीके से परोसे जाते हैं, तो खाने का मज़ा दोगुना हो जाता है। थाली में हर चीज़ थोड़ी-थोड़ी मात्रा में रखनी चाहिए ताकि सबका स्वाद लिया जा सके। होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में थाली को ज्यादा भरा हुआ नहीं रखना चाहिए, बल्कि संतुलित और साफ-सुथरा परोसना चाहिए। एक कटोरी मिठाई और सलाद का छोटा हिस्सा थाली को पूरा बना देता है।
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में मेहमानों को सम्मान देने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि उन्हें प्यार और मुस्कान के साथ खाना परोसा जाए। यही होली की असली भावना है। होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी में अच्छी तरह सजी थाली त्योहार की खुशियों को और बढ़ा देती है।
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी की पूरी थाली
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी की पूरी थाली में दाल, सब्ज़ी, चावल, पूड़ी, रायता, सलाद और मिठाई शामिल होती है। यह थाली न केवल स्वाद से भरपूर होती है बल्कि शरीर को जरूरी पोषण भी देती है।होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी का मकसद सिर्फ पेट भरना नहीं बल्कि परिवार और दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटना होता है। जब सभी लोग रंग खेलने के बाद एक साथ बैठकर खाना खाते हैं, तो वही पल जिंदगी भर याद रहते हैं।
होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी अगर संतुलित और प्यार से बनाई जाए, तो त्योहार की खुशी कई गुना बढ़ जाती है। यही वजह है कि होली का दोपहर का खाना हर भारतीय घर में खास माना जाता है। होली पर दोपहर के खाने की रेसिपी सही योजना के साथ बनाई जाए, तो बिना थकान के भी एक शानदार होली लंच तैयार किया जा सकता है।